डा. विनायक राव मोरे

हृदय रोग और मैं

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हृदय रोग और मैं
7 जुलाई 1977 की रात करीब 11-12 बजे दाहिने हाथ की अंगुलियों से लेकर दाहिने कंधे एवं दायीं छाती में अचानक बहुत तेज दर्द होने लगा। कुछ ही क्षणों में वह वेदना बढ़कर हृदय में बायीं तरफ तक पहुंचकर असह्य पीड़ा देने लगी। यह वह पीड़ा थी जिसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में 'एजांइनाÓ नाम दिया गया है तथा तुरंत चिक...
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