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मृत्यु के बाद का जीवन

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मृत्यु के बाद का जीवन
मृत्यु के बाद प्राणी की स्थिति क्या रहती है, यह जिज्ञासा का विषय रहा है। हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार जीव का पुनर्जन्म होता है। हजारों ऐसे सटीक प्रमाण भी मिले हैं जो पुनर्जन्म को सत्य सिद्ध करते हैं।    लेकिन मृत्यु के बाद तुरंत पुनर्जन्म इसी लोक में होता है या परलोक जाकर फिर उसे लौ...

दालचीनी के कुछ खास प्रयोग

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दालचीनी के कुछ खास प्रयोग
हिन्दी एवं गुजराती में जिसं दालचीनी कहा जाता है उसे मराठी में दारचीनी, अंगे्रजी में सिनेमन, संस्कृत में त्वक तथा लेटिन में कहते हैं।    आयुर्वेद में दालचीनी को कफवातनाशक माना गया है तथा खंासी, दमा, तपेदिक और मन्दाग्नि रोगों में विशेष उपयोगी बताया गया है। इससे बनने वाले प्रमुख योग हैं-...

च्यवनप्राश: एक बहुउपयोगी योग

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च्यवनप्राश: एक बहुउपयोगी योग
जिसका नामकरण प्रथम प्रयोगकत्र्ता के नाम पर हुआ    महर्षि याज्ञवल्क्य की दो पत्नियां थी, मैत्रेयी और कात्यायनी। याज्ञवल्क्य विरक्त होकर वन जाने लगे, तब उनकी पत्नी कात्यायनी जिसे माया से कुछ ज्यादा ही मोह था, बोली देव! जाने से पहले अपनी सम्पत्ति का बंटबारा कर दो, ताकि बाद में कोई विवाद ...

पेशाब कष्ट से उतरने की स्थिति में निम्नांकित उपाय कर सकते हैं

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पेशाब कष्ट से उतरने की स्थिति में निम्नांकित उपाय कर सकते हैं
द्य तुलसी के बीजों का पाउडर चुटकी भर मात्रा में लेकर पानी के साथ सेवन करावें।    द्य लाल साठी की जड़ का काढ़ा बनाकर पिलाने से शीघ्र ही मूत्रत्याग हो जाता है।    द्य गोखरु के बीजों का काढ़ा पिलाने पर भी मूत्र विसर्जन होने लगता है।    द्य सफेद चन्दन का शर्ब...

जब बच्चा रोता ही जायें

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जब बच्चा रोता ही जायें
अबोध एवं छोटी आयु के शिशु अपनी  जरुरत तथा व्यथा रोकर के ही व्यक्त कर सकते हैं। चूंकि वे बोलने में तो असमर्थ होते हैं अत: ऐसी स्थिति में उनके लगातार रोने से ही यह कयास लगाये जा सकते हैं कि उसे भूख-प्यास लगी है, अथवा कोई न कोई कष्ट अवश्य होगा। यदि बालक भूखा है, तब भी रोकर के ही अपनी भूख का अहसास ...

ताकत बढ़ाने वाले आसान नुस्खे

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ताकत बढ़ाने वाले आसान नुस्खे
 अश्वगंधा में वीर्य को गाढ़ा करने का विशेष गुण है। एक अच्छी बात यह है कि इसके सेवन से प्राय: कब्ज नहीं होता। अश्वगंधा, मिश्री और शहद 3-3 ग्राम (1-1 चम्मच भर) तथा गाय का घी 2 चम्मच मिलाकर सुबह नाश्ते के बाद और सायं को सोने से पूर्व शीत ऋतु के 4 महीने भर लेते रहने से बलहीन वृद्ध में भी युवासम उत्...

गर्भावस्था में दवाओं का सेवन सावधानी से करें

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गर्भावस्था में दवाओं का सेवन सावधानी से करें
गर्भकाल हर दम्पत्ति के लिए महत्वपूर्ण पर नाजुक अवधि होती है। हर दम्पत्ति की इच्छा होती है कि गर्भकाल में असामान्य परेशानियां, जटिलताएं न हो, प्रसव सामान्य ढंग से हो और हष्ट-पुष्ट, स्वस्थ शिशु का जन्म हो। इसके लिए कुछ सावधानियां रखना आवश्यक है। विभिन्न स्वरूप, गंभीरता में जन्मजात असामान्यताएँ, विकृति...

वामन को विराट बना देने वाला पेय: दूध

वामन को विराट बना देने वाला पेय: दूध
    पुराणों में वर्जित अमृत-मंथन वाली कथा हम सब जानते हैं। अमृत 'क्षीर सागरÓ के मंथन से ही मिलता है। 'क्षीरÓ का मतलब है, दूध। दूध का एक नाम अमृत भी है। मनुष्यों के जीवन में दूध का कितना महत्व है, यह शब्दों में लिख पाना संभव नहीं है। पैदा हुआ शिशु सबसे पहले दूध की ही गुहार लगता है, माँ...

घरेलू औषधियों को उपयोग कब और कैसे करें

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घरेलू औषधियों को उपयोग कब और कैसे करें
हमारे दैनिक जीवन में रसोई में उपयोग किए जाने वाले लगभग सभी मसाले औषधीय गुणों से युक्त होते हैं। लेकिन अधिकांश लोग गुणों और उपयोगिता के बारे में जानकारी न होने की वजह से इनका भरपूर लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। इस सन्दर्भ में यह जानकारी जरुर लाभदायक सिद्ध हो सकती है।    लहसुन- लहसुन ...

शीतकाल का पौष्टिक धान्य- तिल

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शीतकाल का पौष्टिक धान्य- तिल
तिल एक पौष्टिक धान्य (अन्न) है। तिल नन्हा जरुर होता है लेकिन इसके करतब विलक्षण हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने तिल के गुणों की चर्चा विस्तृत रूप से की है। इसका प्रयोग हर समय बेहतर होता है लेकिन जाड़े में तिल का सेवन ज्यादा किया जाता है। यही कारण है कि इस मौसम में तिल के लड्डू, तिल पापड़, गजक, रेवड़ी आदि इ...
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