• अचूक प्रयोग विशेषांक

अचूक प्रयोग विशेषांक

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शरीर के किसी अंग विशेष का महत्व उस समय ज्यादा अनुभव होता है, जब वह क्षतिग्रस्त होकर अपनी कार्यप्रणाली को कुप्रभावित कर देता है। मसलन दांतों के महत्व पर हम सामान्यावस्था में उतना ध्यान नहीं देते। लेकिन जब कोई दांत टूट जाता है या किसी दाढ़ में दर्द की शिकायत होने से भोजन करने में जब परेशानी होने लगती है और बार-बार पीडि़त दांत पर ध्यान जाता है तब दांतों की अहमियत हम ज्यादा अच्छी तरह समझ पाते हैं। इसी प्रकार आंखों की अहमियत उससे ज्यादा कौन समझ सकता है जो आंखों की रोशनी खो बैठा है।
आज चहुं ओर स्वास्थ्य के प्रति जो चेतना जाग्रत हुई है उसका एक बड़ा कारण है, सेहत में सेंध लगाने वाले रोगों का बढऩा। देखने में आ रहा है कि 45-50 की उम्र के बाद अधिकांश स्त्री-पुरूष किसी न किसी छोटे-बड़े रोग की चपेट में आ रहे हैं। कोई किसी न किसी वात रोग से पीडि़त है तो कोई पित्त या कफ  प्रकोप अथवा इनके मिले-जुले प्रकोप की वजह से। कई लोग मधुमेह से परेशान हैं तो बहुत से ह्रदय, यकृत की व्याधियों से। कुछ लोग तो कैंसर जैसी घातक बीमारियों से जूझने को विवश हैं।
देखा जाता है कि ज्यादातर लोग पूर्व में सेहत के प्रति बरती गई लापरवाहियों के कारण रोगी हुए हैं लेकिन बहुत से लोग उन कारणों से रोगग्रस्त होते हैं जिन कारणों को दूर कर पाना हमारे वश में नहीं होता, जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण या ध्वनि प्रदूषण आदि-आदि से।
रोगों की बढ़ती व्यापकता से स्वास्थ्य के प्रति चेतना का बढऩा स्वाभाविक है क्योंकि कोई भी व्यक्ति रोग ग्रस्तनहीं होना चाहता, सभी चाहते हैं कि वे जब तक जिएं स्वास्थ्य का भरपूर आनन्द लेते रहें।
आपकी इस प्रिय पत्रिका के प्रत्येक अंक में हम ऐसी ही जानकारियां बहुलता से देते हैं जो आपके स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं और आपको चुस्त-दुरूस्त रखने में कारगर सिद्ध हो सकती हैं।
प्रस्तुत अंक भी स्वास्थ्य रक्षक एवं स्वास्थ्य संवर्धन से जुड़ी जानकारियों से भरपूर है।
हमें विश्वास है कि आप इन जानकारियों का लाभ अवश्य प्राप्त करेंगे-करते रहेंगे।

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